Moral Stories in Hindi for Class 5 I Latest 2018

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     Moral Stories in Hindi for Class 5 I Latest 2018

#1 Class 5 Stories बदलाव 

जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते है जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है और सोचते है कि क्या किया जा सकता है क्योंकि इतनी जल्दी तो सब कुछ बदलना संभव नहीं है और क्या पता मेरा ये छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आएगा या नहीं लेकिन मैं आपको बता दूँ हर चीज़ या बदलाव की शुरुआत बहुत ही basic ढंग से होती है | कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़े ही कदम दूर होती है कि हम हार मान लेते है जबकि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी बदलाव छोटा नहीं होता और वो हमारी जिन्दगी में एक नीव का पत्थर भी साबित हो सकता है | चलिए एक कहानी पढ़ते है इसके द्वारा समझने में आसानी होगी कि छोटा बदलाव किस कदर महत्वपूर्ण है |

एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था | वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी | एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |

वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी ! मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और  इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |”  क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचता जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |

यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |

महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया कि भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदल्वाव आयेगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |

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#2 Class 5 Stories : धन की चिंता

एक शहर में एक गरीब मोची और अमीर सेठ आमने-सामने रहते थे। मोची की टूटी-फूटी झोंपड़ी थी और सेठ का भव्य महल। मोची जूते-चप्पलें सिलकर अपना गुजारा चलाता था। उसे रोज ही गुजारे लायक पैसा मिल जाता था। वह चैन की बाँसुरी बजाता जीवन जी रहा था। सेठ की आमदनी इतनी थी कि वह चाहकर भी पूरा पैसा नहीं खर्च कर पाता था। उसे तरह-तरह की चिताएँ सताती रहती थीं। घर में धन-सम्पति जमा रहने के कारण उसे रातभर उसकी सुरक्षा की चिंता के मारे नींद नहीं आती थी। सेठ मोची को देखकर ईर्ष्या करने लगा।

एक दिन एक उपाय सूझा। उसने मोची को बुलाया और उसे ढेर सारा पैसा देते हुए बोला – ”मैं ये पैसा तुम्हें दान कर रहा हूं। इसे लौटाने की जरूरत नहीं है।”

मोची धन पाकर बहुत खुश हुआ। उसने वह धन अपनी झोंपड़ी में रख लिया। रात हुई तो उसे भी धन की सुरक्षा की चिंता सताने लगी। इस चिंता में उसे नींद नहीं आई। धन की चिंता में उसकी हालत खराब हो गई। सुबह उठते ही वह सारा धन लेकर सेठ के पास पहुंचा और बोला – ”सेठ जी, तुमने इस धन से ज्यादा मुझे चिंता दे दी है। ऐसा धन, जिससे चिंता मिले, मेरे किस काम का। इसे आप अपने खजाने में ही रखें तो ज्यादा बेहतर होगा।”

#3 Class 5 Stories मैले कपडे – Dirty clothes story

Dirty clothes story – जापान में एक शहर है ओसाका वंहा शहर के निकट ही एक गाँव में एक विद्वान संत रहा करते थे । एक दिन संत अपने एक अनुयायी के साथ सुबह की सैर कर रहे थे । अचानक ही एक व्यक्ति उनके निकट आया और उन्हें बुरा भला कहने लगा । उसने संत के लिए बहुत सारे अपशब्द कहे लेकिन संत फिर भी मुस्कुराते हुए चलते रहे । उस व्यक्ति ने देखा कि संत पर कोई असर नहीं हुआ तो वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और उनके पूर्वजो तक को गालियाँ देने लगा ।

संत फिर भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते रहे और संत पर कोई असर नहीं होते देख वो व्यक्ति निराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया । उस व्यक्ति के जाते ही संत के अनुयायी ने उस संत से पूछा कि अपने उस दुष्ट की बातों का कोई जवाब क्यों नहीं दिया वो बोलता रहा और आप मुस्कुराते रहे क्या आपको उसकी बातों से जरा भी कष्ट नहीं हुआ  ।

संत कुछ नहीं बोले और अपने अनुयायी को अपने पीछे आने का इशारा किया । कुछ देर चलने के बाद वो दोनों संत के कक्ष तक पहुँच गये । उस से संत बोले तुम यही रुको मैं अंदर से अभी आया । कुछ देर बाद संत अपने कमरे से निकले तो उनके हाथों में कुछ मैले कपडे थे उन्होंने बाहर आकर उस अनुयायी से कहा ” ये लो तुम अपने कपडे उतारकर ये कपडे धारण कर लों इस पर उस व्यक्ति ने देखा कि उन कपड़ों में बड़ी तेज अजीब सी दुर्गन्ध आ रही थी इस पर उसने हाथ में लेते ही उन कपड़ों को दूर फेंक दिया ।”

संत बोले अब समझे जब कोई तुमसे बिना मतलब  के बुरा भला कहता है तो तुम क्रोधित होकर उसके फेंके हुए अपशब्द धारण करते हो अपने साफ़ सुथरे कपड़ो की जगह । इसलिए जिस तरह तुम अपने साफ सुथरे कपड़ों की जगह ये मैले कपडे धारण नहीं कर सकते उसी तरह मैं भी उस आदमी में फेंके हुए अपशब्दों को कैसे धारण करता यही वजह थी कि मुझे उसकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ा ।

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#4 Class 5 Stories इंसाफ

एक राजा के पास एक गरीब बूढ़ा आदमी कोई दरख्वास्त लेकर पहुंचा। राजा ने उसे करीब बुलाया। वह अपनी छड़ी टिकाता राजा के पास पहुंचा और छड़ी के सहारे खड़ा होकर अपनी समस्या राजा को बताने लगा।

उस घबराए हुए बूढ़े ने इस बात पर ध्या नही नहीं दिया कि उसकी छड़ी का लोहे का नुकीला सिरा राजा के पाँव पर रखा है। उसके बोझ से छड़ी राजा के पाँव में धँस गई। राजा के चेहरे पर शिकन भी नहीं आई और उसने धैर्य से बूढ़े की पूरी बात सुनी, फिर उसकी दरख्वास्त पर जब उचित आदेश कर दिया। बूढ़ा खुश होकर राजा को दुआएं देता लौट गया।

बूढ़े के जाते ही राजा दर्द से कराहता हुआ गिर पड़ा। तब सबकी नजर उसके पाँव पर पड़ गई और सारी बात समझ में आई। तुरंत चिकित्सक को बुलाया गया।

एक दरबारी ने कहा – ‘महाराज, आपने उसकी छड़ी को पाँव से हटा क्यों न दिया?’

राजा ने कहा – ‘वह गरीब बूढ़ा वैसे ही परेशान था, अपनी बात कहने में इतना घबरा रहा था। अगर उसे पता चलता कि उसने मुझे घायल कर दिया है तो वह पूरी तरह डर जाता और मुझसे कुछ भी नहीं कह पाता। ऐसे में उसके साथ इंसाफ कैसे होता? यह सोचकर मैं चुपचाप दर्द सह गया ताकि बूढ़ा पूरी बात कह सके और मैं उसके साथ इंसाफ कर सकूँ।’

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