New Hindi Short Stories I Hindi Moral Story For Kids 2018

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New Hindi Short Stories I Hindi Moral Story For Kids 2018

New Hindi Short Stories I Hindi Moral Story For Kids 2018 : आज अप्पको हम भोत अच्छी बचों की कहानी बताने वाले है तोह अप्प आनंद उठाये कहानी का Content:

Raja Rani Ki Khani:

दोस्तों आज इस छोटी सी Raja Ki Kahani In Hindi Post में हमें बहुत कुछ सिख मिलती है, एक समय एक राजा शिकार करने के लिए वन में गए , एक हिरण को देख कर उन्होंने अपने घोड़े को उसके पीछे दोड़ाया | उनके बाकी के साथी उनसे पीछे  ही रहे गए | राजा दूर एक ऐसे जंगल में पहुचं गया , जहाँ मीलों तक पानी नहीं था | राजा को प्यास ने बहुत ही ज्यादा व्याकुल कर  दिया था | जब राजा और कुछ आगे बड़े तो उन्हें एक किसान की झोपडी धिकायी दी | राजा दोड़ कर झोपडी के आगे गए | वहां आठ दस  साल की कन्या खेल रही थी राजा ने उस कन्या से कहा बेटी शीघ्र ही एक ग्लास जल लाओ , मुझको बहुत जोरकी प्यास लगी है.

उस कन्या ने Raja को आम मुसाफिर समझ कर लाके एक खाट डाल दी और बेठने के लिए कहा तथा जल का एक ग्लास लाकर राजा के हाथ में थमा दिया राजा ने देखा की पानी में तिनके पड़ें हुए हैं , जिनको देख कर राजा को बहुत क्रोध आया और उसी आवेश में आकर उस कन्या से कहेने लगे की ” तुम्हारे पिता कहाँ हैं ? कन्या ने उत्तर दिया ” मिटटी को मिटटी में मिलाने गए हैं.

राजा को लड़की पर और जियादा क्रोध आया , परंतु प्यास लगी थी , जल पीना था , इसीलिए राजा ने क्रोध को दबा कर कहेने लगे की और साफ जल लाओ | वह कन्या जल लाने के लिए फिरसे झोपडी के अंदर गयी , इतने में ही उस लड़की का पिता भी वहां आगया | उसने तुरंत राजा को पहेचान लिया और उसने प्रणाम किया राजा को और कहेने लगा की ” हुजुर आप एक गरीब की झोपड़ी में कैसे पधारे ?  राजा कहेने लगा की में शिकार के लिए वन में आया था , अपने साथियों से बिचड़ कर दूर आगया हूँ , मुझे बहुत जोर की प्यास लगी थी | यहाँ तुम्हारी कन्या से मेने जल माँगा , तब तुम्हारी कन्या जल में तिनके डाल कर ले आई , जब मेने तुम्हारे बारे में पूछा तो उसने कहा की ” मिटटी को मिटटी में मिलाने गए हैं.

कन्या के पिता कहेने लगे हुजूर कन्या ने ठीक ही उत्तर दिया है | एक सज्जन के बच्चे की मौत होगयी थी हम उसके शरीर को मिटटी में दबाने गए थे | इतने में वो कन्या भी जल का ग्लास लेकर आगयी | किसान ने पूछा बेटी तुमने राजा को अच्छा जल क्यूँ नहीं दिया ? कन्या ने उत्तर दिया , “पिताजी राजा धूप की तेजी में भागते हुए आये थे | सारे शरीर से पसीना छूट रहा था | यदि आते ही जल पिला  दिया जाता तो वो जल राजा को हानिकारक होसकता था में इनके लिए मना तो नहीं कर  सकी , परंतु जल में तिनके डाल लायी , ताकि राजा कुछ समय तक जल न पी सकें.

राजा कन्या की चतुरता को देख कर बहुत प्रसन्न हुए और अपने गले से बहुमूल्य हीरों का हार उस कन्या के गले में डाल दिए , उनको हमेशा हमेशा के लिए दरिद्रता के दुखों से छुड़ा दिए.

जब यहाँ का राजा  भी प्रसन्न होकर यहाँ के दुखों से हमें छुड़ा देता है , तो फिर परम पिता परमात्मा राजी होजाये तो फिर किसकी समर्थ है जो हमको किसी प्रकार का कष्ट दे सके ? परंतु परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए सच्चे प्रेम की आवस्यकता है.

अनेक जप , तप , योग , यग करने से परमात्मा में स्नेह नहीं हो सकता है | जिसने अपने मन्न और इन्द्रियों को अपने वश में नहीं किया है उसका किया हुआ जप , योग इत्यादि उस हाथी के स्नान के समान है | जो नदी में नहाने के बाद धुल को अपने सब अंगों पर डाल लेता है.

मुग़ल वंश के बादशाह और नसीरुद्दीन हुमायूँ के बेटे, जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर और उनके कहे जाने वाले नवरत्न में से एक रत्न बीरबल के किस्से काफी मशहूर हैं । बादशाह अकबर कई बार परेशानियों में फसने पर, या किसी गंभीर मुद्दे पर अपने सलाहकार मंत्री बीरबल की सहायता अवश्य लेते थे।

बीरबल ने सन 1528 से सन 1583 तक बादशाह अकबर के दरबार में एक विदूषक एवं सलाहकार बन कर सेवाएँ दी थी। बीरबल स्वभाव से बुद्धिशाली, और किसी भी समस्या का समाधान ढूँढने में निपुण थे। अकबर और बीरबल के अनगिनत किस्सो में से चुनिन्दा किस्से वार्ता स्वरूप दर्शाये हैं, जिसमे बीरबल के बुद्धिचातुर्य का वर्णन है।इसे भी पढ़ें: Hindi Poem for Kids 2018 

Akbar Birbal Stories in Hindi With Moral

तो आइये अकबर-बीरबल के किस्सों के रूप में प्रचलित ऐसी ही तीन चुनिंदा कहानियां देखते हैं:

मोम का शेर सर्दियों के दिन थे, अकबर का दरबार लगा हुआ था। तभी फारस के राजा का भेजा एक दूत दरबार में उपस्थित हुआ।

राजा को नीचा दिखाने के लिए फारस के राजा ने मोम से बना शेर का एक पुतला बनवाया था और उसे पिंजरे में बंद कर के दूत के हाथों अकबर को भिजवाया, और उन्हे चुनौती दी की इस शेर को पिंजरा खोले बिना बाहर निकाल कर दिखाएं।

बीरबल की अनुपस्थिति के कारण अकबर सोच पड़ गए की अब इस समस्या को कैसे सुलझाया जाए। अकबर ने सोचा कि अगर दी हुई चुनौती पार नहीं की गयी तो जग हसायी होगी। इतने में ही परम चतुर, ज्ञान गुणवान बीरबल आ गए। और उन्होने मामला हाथ में ले लिया।

अकबर अपने सलाहकार बीरबल की इस चतुराई से काफी प्रसन्न हुए और फारस के राजा ने फिर कभी अकबर को चुनौती नहीं दी।

Moral: बुद्धि के बल पर बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है.

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Acchi Dosti:

वह शाम को ऑफिस से घर लौटा, तो पत्नी ने कहा कि आज तुम्हारे बचपन के दोस्त आए थे, उन्हें दस हजार रुपए की तुरंत आवश्यकता थी, मैंने तुम्हारी आलमारी से रुपए निकालकर उन्हें दे दिए। कहीं लिखना हो, तो लिख लेना। इस बात

ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे …

को सुनकर उसका चेहरा हतप्रभ हो गया, आंखें गीली हो गईं, वह अनमना-सा हो गया। पत्नी ने देखा-अरे! क्या बात हो गई। मैंने कुछ गलत कर दिया क्या? उनके सामने तुमसे फोन पर पूछने पर उन्हें अच्छा नहीं लगता। तुम सोचोगे कि इतना सारा धन मैंने तुमसे पूछे बिना कैसे दे दिया। पर मैं तो यही जानती थी कि वह तुम्हारा बचपन का दोस्त है। तुम दोनों अच्छे दोस्त हो, इसलिए मैंने यह हिम्मत कर ली। कोई गलती हो, तो माफ कर दो।

मुझे दु:ख इस बात का नहीं है कि तुमने मेरे दोस्त को रुपए दे दिए। तुमने बिलकुल सही काम किया है। तुमने अपना कर्तव्य निभाना, मुझे इसकी खुशी है। मुझे दु:ख इस बात का है कि मेरा दोस्त तंगी में है, यह मैं कैसे समझ नहीं पाया। उस दस हजार रुपए की आवश्यकता आन पड़ी। इतने समय में मैंने उसका हाल-चाल भी नहीं पूछा। मैंने कभी यह सोचा भी नहीं कि वह मुश्किल में होगा। मैं भी कितना स्वार्थी हूँ कि अपने दोस्त की मजबूरी नहीं समझ पाया। जिस दोस्ती में लेने-देने का गणित होता है, वह केवल नाम की दोस्ती होती है। उसमें अपनत्व नहीं होता। हमने किसी का एक काम किया है, तो सामने वाला भी हमारा काम करेगा, ऐसी अपेक्षा रखना ये दोस्ती नहीं है। दोस्ती को दिल के दरवाजे की खामोश घंटी है, साइलेंट बेल है, जो बजे या न बजे, हमें भीतर से ही इसकी आवाज सुन लेनी चाहिए। यही होती है सच्ची दोस्ती।

डा. महेश परिमल

संक्षिप्त परिचय : छत्तीसगढ़ की सौंधी माटी में जन्मे महेश परमार ‘परिमल’ मूलत: एक लेखक हैं। बचपन से ही पढ़ने के शौक ने युवावस्था में लेखक बना दिया। आजीविका के रूप में पत्रकारिता को अपनाने के बाद लेखनकार्य जीवंत हो उठा। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसके सपने कभी उसकी पलकों में कैद नहीं हुए, बल्कि पलकों पर तैरते रहे और तैरते-तैरते किनारों को अपनी एक पहचान दे ही दी। आज लेखन की दुनिया का इनका भी एक जाना-पहचाना नाम है।

भाषाविज्ञान में पी-एच.डी. का गौरव प्राप्त। अब तक सम-सामयिक विषयों पर एक हजार से अधिक आलेखों का प्रकाशन। आकाशवाणी के लिए फीचर-लेखन, दूरदर्शन के कई समीक्षात्मक कार्यक्रमों की सहभागिता। पाठच्यपुस्तक लेखन में भाषा विशेषज्ञ के रूप में शामिल। विश्वविद्याल स्तर पर अंशकालीन अध्यापन। अब तक दो किताबों का प्रकाशन। पहली ‘लिखो पाती प्यार भरी’ को मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा दुष्यंत कुमार स्मृति पुरस्कार, दूसरी किताब ‘अनदेखा सच’ को पाठकों ने विशेष रूप से सराहा।        धन्यवाद अप्प्का 

 

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